रारी के बैस क्षत्रिय

इस क्षेत्र मे बैसों का आगमन तो काफी पहले हो गया था वे न तो किसी महत्वपूर्ण पदों पर ही थे और न ही भूमि स्वामी ही थे। इस भाग मे गौतम क्षत्रिय ही प्रमुख थे। कन्नौज के राजा से भी उनके अच्छे संबंध थे जिनके अधीन यह भाग था। गौतम क्षत्रियों की स्टेट इस भाग मे थी और अर्गल नामक स्थान पर किला और जागीर का मुख्यालय था।
1250एडी मे अर्गल के राजा ने दिल्ली सल्तनत को ट्रिब्यूट भेजना बंद कर दिया।जब कई बार कहने के बाद भी सालाना राजस्व दिल्ली नही भेजा गया तब युद्ध तो होना ही था। दिल्ली से अवध के सूबेदार खो खबर भेजी गई कि अर्गल के राजा से कर वसूला जाय। अवध का सूबेदार असलम खां फौज फटाके के साथ अर्गल मे आ धमका। अर्गल वाले पहले से ही तैयार थे अतः सूबेदार को मुहकी खानी पड़ी और लौटना पड़ा। मगर वह उन्नाव जिले मे गंगा पार बक्सर के पास ही रुक गया और अवसर का इंतजार करता रहा। उसको अवसर भी जल्द ही मिल गया। कारण अर्गल की रानी की एक छोटी सी गलती से। गलती क्या थी वह अगली किस्त मे। 

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